• जब इंदिरा ने इमर्जेंसी में सेंसरशिप से बचाई श्याम बेनेगल की फिल्म

    indira gandhi protected shayam benegal film from censorship during emergency
    श्याम बेनेगल (फाइल फोटो)

    मशहूर फिल्म डायरेक्टर श्याम बेनेगल ने खुलासा किया है कि जब साल 1975 में इमर्जेंसी में प्रेस की आजादी और फिल्मों पर अंकुश लगाया जा रहा था तब खुद इंदिरा गांधी ने हस्तक्षेप कर उनकी फिल्म को सेंसरशिप से बचाया था। बेनेगल ने यह खुलासा अपनी एक नई कॉफी टेबल बुक में किया है। 

    श्याम बेनेगल ने इसमें बताया है कि कैसे इंदिरा गांधी ने उनके फिल्मी करियर को खत्म होने से बचाया था। अपनी किताब के एक चैप्टर में उन्होंने लिखा है कि जब तेलंगाना आंदोलन को दिखाने वाली उनकी फिल्म को जब सेंसर बोर्ड ने इमर्जेंसी का हवाला देते हुए बैन किया तो उन्होंने इंदिरा गांधी के लिए विशेष स्क्रीनिंग का आयोजन किया जिसमें उन्होंने पूछा कि उनकी फिल्म 'निशांत' को सेंसर सर्टिफिकेट क्यों नहीं दिया गया।

    बेनेगल ने लिखा है,'फिल्म देखने के बाद प्रधानमंत्री ने जो टिप्पणी की वह यह थी कि आपकी फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट क्यों नहीं दिया गया। उन्हें लगा कि फिल्म को सेंसर सर्टीफिकेट नहीं दिए जाने से सरकार असंवेदनशील और संकीर्ण नजर आएगी। इसके बाद सेंसर बोर्ड के पास फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा।' उन्होंने लिखा कि कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारत की तरफ से भेजे जाने के बावजूद फिल्म को फौरन प्रतिबंधित कर दिया गया। यह फिल्म 1946-1951 के बीच तेलंगाना आंदोलन के दौरान एक गांव में हुए विद्रोह की कहानी पर आधारित थी।

    बेनेगल ने बताया है कि जब फिल्म को सेंसर बोर्ड से पास कराने के सारे रास्ते बंद हो गए थे तब फिल्म की स्क्रीनिंग इंदिरा गांधी के सामने कराने पर विचार किया गया। बेनेगल ने इस किताब में आंतरिक आपातकाल लागू किए जाने को इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान एकमात्र दाग करार दिया है। इस किताब का विमोचन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने शनिवार को किया था।
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